Home Remedies For Diarrhea: अतिसार के लिए आयुर्वेदिक औषधि

Home Remedies For Diarrhea: यह आर्टिकल उनलोगो के लिए है जिन्हे अतिसार (Diarrhea) की समस्या रहती है। इसमें अतिसार को ठीक करने के सभी आयुर्वेदिक औषधियों के बारे में बताया गया है। तो चलिए जानते है Diarrhea Home Remedies के बारे में।

Home Remedies For Diarrhea
Home Remedies For Diarrhea

बबूल: Home Remedies For Diarrhea

कीकर जिसे बबूल के नाम से भी जाना जाता है, प्रयोज्य अंग के रूप में इसके कांड, पत्र, फल, कांड की छाल और गोंद इस्तेमाल किया जाता है। अतिसार में कीकर के पत्तियों का स्वरस छाछ में मिलाकर पिलाने से अतिसार में लाभ होता है।  

सुलतान : Muktvarcha Kuppi

इसे मुक्तवर्चा या कुप्पी के नाम से भी जाना जाता है, Home Remedies रूप में इसके पंचांग, पत्र एवं पुष्प का इस्तेमाल किया जाता है। अतिसार में इसके पुष्प का चूर्ण लेने से लाभ होता है।

अतिविषा: Home Remedies For Diarrhea

इसको अतीस के नाम से जाना जाता है, इसके मूल कंद 1 इंच लम्बा तथा 1/2 इंच मोटा होता है। अतिसार के इलाज के लिए आयुर्वेदिक औषधि के रूप में इसके कंद का चूर्ण का सेवन करने से लाभ होता है।

वच

इसे उग्रगंधा या घोर वच के नाम से जाना जाता है, वच कीचड़ या जल में उगने वाला लघु गुल्म होता है। औषधि के रूप में इसके भूमिगत कांड का प्रयोग किया जाता है। अतिसार के इलाज के लिए इसके भूमिगत कांड के चूर्ण का इस्तेमाल करने से लाभ होता है।

अडूसा: अतिसार के इलाज के लिए आयुर्वेदिक औषधि

यह वासा के नाम से भी जाना जाता है, इसके क्षुप 4-8 फुट उचे होते है। प्रयोज्य अंग के रूप में इसके पंचांग, पत्र, पुष्प एवं मूल की छाल का इस्तेमाल किया जाता है। अतिसार के इलाज के लिए आयुर्वेदिक औषधि के रूप में इसके पत्तो का स्वरस लेने से फयदा होता है।

हंसराज

इसको हंसपदी के नाम से जाना जाता है, यह एक छोटा और आकर्षक क्षुप होता है। प्रयोज्य अंग के रूप में इसके पंचांग का इस्तेमाल होता है। अतिसार के लिए आयुर्वेदिक औषधि के रूप में इसके पंचांग का चूर्ण का सेवन करने से फायदा होता है।

बेल: अतिसार के लिए आयुर्वेदिक औषधि

यह एक चिरस्थायी वृक्ष होता है, जिसकी शाखाओं पर कांटे लगे होते है। बेल के पुष्प श्वेत हरिताभ होते है। अतिसार के लिए आयुर्वेदिक औषधि के रूप में इसके फल का सेवन करने से लाभ होता है।

महानिम्ब

इसको घोड़ करंज या अरलू महानिम्ब के नाम से भी जाना जाता है। महानिम्ब का वृक्ष 60 से 80 फुट ऊँचा होता है तथा इसके पुष्प पिले हरे रंग के होते है। अतिसार के इलाज के लिए आयुर्वेदिक औषधि के रूप में इसके त्वचा का पुट पाक विधि से रस निकाल कर मधु के साथ सेवन करने से चिरकालीन अतिसार भी नष्ट हो जाता है।

सतवन

इसको सतौना या सप्तपर्ण के नाम से भी जाना जाता है। सतौना का वृक्ष काफी विशाल होता है, इसके पुष्प सफ़ेद रंग के होते है। औषधि के रूप में पत्र, छाल एवं काष्ठ का प्रयोग किया जाता है। अतिसार के इलाज के लिए औषधि के रूप में सतवन के छाल का क्वाथ का सेवन करने से लाभ होता है।

बड़ी इलायची

हल्दी के पौधे की तरह ही इसका भी पौधा होता है, जिसकी औसत उचाई 100-200 से. मी. होता है। औषधि के रूप में इसके सूखे पके हुए फल एवं बीज का इस्तेमाल होता है। अतिसार के उपचार के लिए औषधि के रूप में बड़ी इलायची के बीज का क्वाथ का सेवन करने से फायदा होता है।

Home Remedies For Diarrhea
Home Remedies For Diarrhea

सुपारी

इसको पूगीफल के नाम से जाना जाता है, इसका वृक्ष लम्बा पतला पाम जैसा होता है। प्रयोज्य अंग के रूप में इसके मूल, पत्र एवं बीज का इस्तेमाल होता है। अतिसार के उपचार के लिए आयुर्वेदिक औषधि के रूप में सुपारी के चूर्ण का सेवन करने से फायदा होता है।

कटहल

इसको पनश के नाम से जाना जाता है, इसका वृक्ष विशाल होता है। औषधि के रूप में इसके मूल, छाल, पत्र एवं फल का इस्तेमाल किया जाता है। अतिसार के उपचार के लिए कटहल के मूल के क्वाथ का इस्तेमाल करने से लाभ होता है।

सफ़ेद मुशली

इसकी लता विशाल कंटकीय होता है, सफ़ेद मुशली का स्वाद मधुर होता है। अतिसार के उपचार के लिए औषधि के रूप में सफ़ेद मुशली का चूर्ण का सेवन करने से लाभ होता है।

कोविदार

इसको रक्त कंचन भी कहा जाता है, यह मध्यम कद का सदा हरित वृक्ष होता है। प्रयोज्य अंग के रूप में इसके कांड की छाल, पुष्प एवं पत्र का इस्तेमाल किया जाता है। अतिसार के उपचार के लिए आयुर्वेदिक औषधि के रूप में पुष्प कली का चूर्ण का सेवन करने से फायदा होता है।

कचनार

यह एक मध्यम कद का वृक्ष होता है, जिसपर बड़े सुगंधित पुष्प लगे होते है जोकि गुलाबी बैगनी रंग के होते है। अतिसार के इलाज के लिए आयुर्वेदिक औषधि के रूप कचनार के कांड की छाल का क्वाथ का सेवन करने से लाभ होता है।

पथरचूर

यह एक मजबूत उन्नत चिरस्थायी गुल्म है, जिसके पुष्प नलिकाकार रक्तवर्णी होता है। प्रयोज्य अंग के रूप में इसके पत्र एवं इसका स्वरस का इस्तेमाल किया जाता है। अतिसार के इलाज के लिए औषधि के रूप में पथरचूर के पत्तो का रस आधा तोला, घी एवं जीरा के साथ देने से लाभ होता है।

पलाश

इसकी औसतन ऊंचाई 15 मीटर तक होती है, औषधीय प्रयोग हेतु पलाश का छाल, पुष्प, बीज और गोंद का इस्तेमाल किया जाता है। भोजन के बाद पलाश के गोद का सेवन करने से अतिसार में लाभ मिलता है।

भांग

यह एक 3 से 4 फुट ऊँचा छोटा गुल्म होता है, भांग के पुष्प छोटे एकलिंगी तथा श्वेत हरिताभ होता है। औषधि के रूप में इसके पत्र, नरपुष्प, शाखा एवं राल का इस्तेमाल किया जाता है। भांग के पुष्प शाखा के अग्र भाग का प्रयोग करने से अतिसार में लाभ होता है।

मिरचा (हरी, लाल)

यह एक छोटा गुल्म होता है जिसकी कांड बैगनी रंग का होता है। मिर्चा के पुष्प सफेद होते है तथा पत्र कोण होते है, औषधि प्रयोग में इसके फल का इस्तेमाल किया जाता है। अतिसार में इसके फल का कल्क का सेवन करने से लाभ होता है।

नन्दीवृक्ष

यह ऊँचे कद का आकर्षक वृक्ष होता है जिसकी ऊँचाई 55 से 90 फिट का होता है। इसके पत्र संयुक्त तथा तिरछी होती है वही पुष्प नन्दीवृक्ष के पुष्प सुगंधित तथा श्वेतवर्णी होता है। प्रयोज्य अंग के रूप में इसकी कांड की छाल एवं पुष्प का इस्तेमाल किया जाता है। अतिसार में छाल के फांट में कालीमिर्च मिलाकर सेवन करने से फायदा होता है।

रातरानी

यह एक बहुत ही कमजोर अतिशाखीत क्षुप होता है, जिसके सुगंधित सफ़ेद पीतवर्णी पुष्प लगे होते है। औषधि के रूप में प्रयोग होने वाले अंगों में इसके सभी हवाई अंग का इस्तेमाल किया जाता है। अतिसार में रातरानी के हवाई अंगों का सत का इस्तेमाल करने से लाभ होता है।

चीनिया कपूर

यह एक मध्य्म कद का सदा हरित सुंदर वृक्ष होता है, जिसकी ऊँचाई 20 से 25 मीटर तक होती है। इसपे छोटे पीतवर्णी या क्रीमीश श्वेत रंग के पुष्प लगते है। औषधि के रूप में इसके कांड, पत्र एवं सत का इस्तेमाल होता है। अतिसार के उपचार हेतु चीनिया कपूर का सेवन बतासे के साथ करने से लाभ होता है।

पाठा

यह एक काष्टीय घनी लता होती है, जिसके कांड पर खाँच युक्त रोमेश होते है। पाठा के पत्र गोल छत्राकार हृदयाकार होते है, वहीं इसके पुष्प सूक्ष्म तथा श्वेत हरित होते है। औषधि के रूप प्रयोज्य होने वाले अंगों में इसके मूल एवं छाल का इस्तेमाल होता है। अतिसार के उपचार में पाठा के मूल का क्वाथ का सेवन करने से लाभ होता है।

कागजी नींबू

यह एक छोटा कंट की क्षुप जैसा वृक्ष होता है जिसकी ऊँचाई 5 से 10 फुट होता है। इसके पुष्प श्वेत तथा पत्र कोण में होते है। औषधीय प्रयोग के रूप में इसके फल का इस्तेमाल किया जाता है। अतिसार में निम्बू के रस में अदरक का रस और कालानमक मिलाकर भोजन से पहले सेवन करने से लाभ होता है।

धनियां

यह एक ऐसा गुल्म है जिसका औषधि के रूप में फल, पत्र एवं पंचांग का इस्तेमाल होता है। अतिसार में धनिया के 5 से 7 ग्राम चूर्ण का सेवन करने से लाभ होता है।

सफेद जीरा

यह एक ऐसा क्षुप है जिसे खेतों में बोया जाता है, इसके पुष्प छोटे छोटे सफेद होते है। औषधीय प्रयोग हेतु जीरा का फल इस्तेमाल में लिया जाता है। अतिसार होने पर सफ़ेद जीरा के फल का चूर्ण 1 से 2 माशा लेने पर लाभ होता है।

काली मूसली

यह लघु गुल्म होता है जिसका मूल कंद मजबूत तथा मूलतन्तु मांसल होते है। काली मूसली के पत्र 3 से 16 इंच लम्बे होते है तथा इसके पुष्प पीतवर्णी होते है। काली मूसली के प्रयोज्य अंगों के रूप में इसका मूल तथा भूमिगत कांड का इस्तेमाल होता है। अतिसार के उपचार हेतु इसके मूलस्तम्भ का चूर्ण 3 से 6 ग्राम लेने से लाभ प्राप्त होता है।

यह भी पढ़े :

Home Remedies For Hemorrhoid: बवासीर के लिए आयुर्वेदिक औषधि

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *