Sheetal Devi Arjun Award हाथों से नहीं ले सकीं, राष्ट्रपति भवन हाल में कम पड़ गईं शीतल देवी के लिए तालियां

Sheetal Devi Arjun Award: अगर आपके हौसले बुलंद है तो मुस्किले चाहे कितनी हो आपको अपने लक्ष्य को हाशिल करने से कोई नहीं रोक सकता है। किश्तवाड़ (जम्मूकश्मीर) के लोईधर की रहने वाली शीतल देवी ने कुछ ऐसा की कारनामा कर दिखाया है। आज राष्ट्रपति भवन में जब Sheetal Arjun Award हाथों से नहीं ले सकीं तब पूरा भवन तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

आपको बता दे कि Sheetal Devi एक पैरा तीरंदाज है जिनके दोनों हाथ नहीं है। जिस कारण से जब राष्ट्रपति राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उन्हें सम्मानित कर रही थी तब तो पूरा भवन तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

कौन है Arjun Award विजेता Sheetal Devi?

शीतल देवी का जन्म जम्मूकश्मीर के एक छोटे से गावं लोईधर (किश्तवाड़) में हुआ था। शीतल देवी एक किसान परिवार से आती है। इनके पिता खेती बाड़ी करते है तो इनकी माँ घर को सम्भलती है। 16 वर्षीय शीतल देवी ने कभी भी अपने दिव्यांगता को अपने ऊपर हाबी नहीं होने दिया और आज उनकी उपलब्धियों के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया है।

Sheetal Devi Arjun Award.
Sheetal Devi Arjun Award.

Sheetal फोकोमेलिया बीमारी से है पीड़ित

शीतल देवी को एक दुर्लभ प्रकार की बीमारी है, बपचन से ही शीतल देवी फोकोमेलिया नामक बीमारी से पीड़ित है। जिस कारण से शीतल के शरीर का पूर्ण विकास नहीं हो पाया और इनके दोनों बाजू विकसित नहीं हो पाए। लेकिन इस विजेता खिलाडी ने कभी भी अपने इस दिव्यांगता को अभिशाप नहीं समझा और पैरो से तीरंदाजी कर पूरी दुनिया में अपना गौरव हासिल किया है।

पैरा एशियन गेम्स Sheetal Devi Arjun Award

काफी जीवन संघर्षपूर्ण जीवन होने के बावजूद आज Sheetal Devi विश्व की नंबर- 1 पैरा तीरंदाज खिलाड़ी है। शीतल देवी ने अपने पहले ही पैरा एशियाई खेलो में रिकॉर्ड तीन पदक अपने नाम की थी।

पैरा एशियन गेम्स में मेडल जीतकर देश का परचम लहराया। पैरों से तीर-धनुष चलाने वाली शीतल देवी ने पिछले साल पैरा एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल अपने नाम किया। उनकी इस उपलब्धि के लिए उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। पैरों से तीर-धनुष चलाकर Sheetal Devi ने पैरा एशियन गेम्स में दो गोल्ड और एक सिल्वर मेडल जीता था। जिसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके जज्बे को सलाम किया था। Source

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